Sunday, August 28, 2011

प्यार का तेरे आसरा हो
तेरे घर में सासरा हो
लंहगा चोली घाघरा हो
उसमे यौवन झान्क्रा हो


मोरा मन मोरा बन नाच रहा .

तू बन -ठन बन -बन भाग रहा .

- मुकेश मासूम

Wednesday, February 24, 2010

ख़ुदकुशी न करो

जिंदगी से कभी बेरुखी न करो

दर्दो गम से सनम दोस्ती न करो

खूबसूरत है ये जिंदगी दोस्तों

ख़ुदकुशी न करो ख़ुदकुशी न करो

(एक्स्प्लैनिंग गाइड

डोंट ट्राई सुसाइड )

खुद से होते नहीं इस तरहा से खफा

भूल जा उसको तू जो हुआ बेवफा

दिल से गम को कहो अलविदा -अलविदा

अश्क बहने न दो खुश रहो तुम सदा ।

दिल लगी से कभी दिल्लगी न करो






आज सूखी फसल , या तो टूटा है हल

कर्ज की मार से दिल उठा है दहल

बैल प्यासे खड़े , या तो रूठा है नल

हौसला तो दिखा , तू ही होगा सफल

हर घड़ी इस कदर दिल दुखी न करो




फेल हो, पास हो , इसका गम न करो

अपने विशवास को , यार कम न करों

अपनी मुस्कान को ऐसे गुम् न करो

हँसते गाते रहो , आँख नम न करो

गर्दिशों का कभी तुम यकी न करो








- मुकेश कुमार मासूम

Wednesday, January 6, 2010

थ्री नहीं सिक्स इडियट्स

आजकल हर तरफ थ्री इडियट्स की चर्चा है. आमिर खान , माधवन , शर्मन जोशी , करीना कपूर और बोमन इरानी के अभिनय से सजी यह फिल्म बहुत अच्छा कारोबार कर रही है, करना भी चाहिए . यह फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी और दर्शकों के लिए भी खुशी की बात है. देखने वालों को अच्छी फिल्म मिल गयी और बनाने वालों को दौलत. हिसाब-किताब बराबर , मगर इसके प्रचार में तरीका क्या अपनाया जा रहा है ? कुछ दिनों पहले अपनी नयी फिल्म का प्रमोशन करने के लिए नेहा धूपिया जैसी अभिनेत्री ने भी दर्शक छात्रों पर कंडोम फेंके थे, न सिर्फ कंडोम फेंके बल्कि फेंकने के बाद उस क्रत्य को बहुत अच्छा कम करार दिया था. अब फिर से इडियट्स पर आते हैं . हाँ तो ये प्रचार का तरीका क्या है ? न न , मुझे आमिर के भेष बदलकर घूमने से कोई फर्क नहीं पड़ता . मैं बात कर रहा हूँ अंग्रेजी उपन्यासकार चेतन भगत प्रकरण की . विधु विनोद चौपडा और राजकुमार हिरानी कहते हैं की उन्होंने बाकायदा चेतन को रुपये दिए तब उनकी किताब के अधिकार खरीदे गए. चेतन भगत कहते हैं उनका नाम फिल्म में बतौर कहानीकार आना चाहिए . इस पर निर्माता तर्क देते हैं की उन्होंने इस बात की जिक्र स्क्रीन पर किया है की यह कहानी चेतन की किताब पर आधारित है. देश -विदेश के अखबारों और टीवी चैनलों ने इस विवाद को खूब तवज्जो दी. यहाँ तक की इस पर विशेष परिचर्चा रखी गयी, विधु विनोद चौपडा एक संवाददाता सम्मलेन में पत्रकारों पर खूब भडके भी, आखिर ईडियट के निर्माता जो ठहरे. मगर सवाल उठता है की चेतन जैसे समझदार व्यक्ति ने इस बाबत पुलिस में कोई शिकायत दर्ज क्यों नहीं की की ? अदालत की शरण में क्यों नहीं गए ? इसका सीधा सा जवाब है की अगर चेतन ऐसा करते तो फिल्म पर बिन लग सकता था , इसी आर्थिक नुक्सान हो सकता था क्योंकि एक बार अगर प्रिंट निकले तो उनमे किसी तरह का करेक्शन आसानी से सम्भव नहीं होता. मगर ऐसा नहीं हुआ . न शिकायत हुई और न फिल्म को नुक्सान हुआ . तो फिर हुआ क्या ? अब इतने हाई -फाई ईडियट ऐसे ही तो कुछ करने वाले हैं नहीं . और जो हुआ वो सब जानते हैं. फिल्म की जबरदस्त पब्लिशिटी फ़ोकट में हो गयी. तो इस तरह थ्री ईडियट परदे पर कमाल दिखा रहे हैं तो थ्री ईडियट परदे के पीछे कमाल दिखा गए. सिक्स इडियट्स ने करोड़ों को ईडियट बना डाला . जय हो इडियट्स ... तुस्सी ग्रेट हो...
मुकेश कुमार मासूम

दिल लेके दगा देते हैं

जादू सा चला देते हैं , सीने में बसा लेते हैं
ये हुस्न के मालिक देखो , दिल लेके दगा देते हैं

पहले जब मिलते हैं तो ऐसे मुस्काएं
सीने से उछलता दिल ये ऐसे शर्मायें
कातिल हैं अदा ऐसी साधू भी फिसल जाएँ
इक बार मिला जो भी मुश्किल है संभल पायें
पल भर में हंसा देते हैं, पल भर में रुला देते हैं


-मुकेश कुमार मासूम

मुकेश कुमार मासूम


mukesh masoom

mukesh kumar masoom